रायपुर: छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल कोर्स संचालन की अनुमति के प्रस्ताव पर कांग्रेस का विरोध; राज्यपाल को पत्र सौंपकर संशोधन रोकने की मांग
रायपुर: छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल और हेल्थ से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति देने के सरकारी प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा है और प्रस्तावित संशोधन को तत्काल रोकने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 को पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय अधिनियम, 2008 की धारा 6(1) और 6(2) में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है।
- प्रस्तावित बदलाव: इसके माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों को Medicine, Nursing, Ayurveda, Homeopathy, Physiotherapy, Dental और Health Allied Sciences समेत अन्य सभी स्वास्थ्य संबंधी पाठ्यक्रम संचालित करने की कानूनी अनुमति देने का प्रावधान है।
- कांग्रेस का विरोध: कांग्रेस का तर्क है कि यह बदलाव वर्ष 2008 में बनाए गए स्वास्थ्य विश्वविद्यालय अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस के मुख्य तर्क और आपत्तियां
- मेडिकल शिक्षा का विकेंद्रीकरण और बंटवारा: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा कि वर्तमान व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में मेडिकल शिक्षा के लिए एक समान शैक्षणिक मानक, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, क्लिनिकल ट्रेनिंग और गुणवत्ता नियंत्रण बनाए रखना है। निजी विश्वविद्यालयों को अनुमति मिलने पर अलग-अलग शैक्षणिक और परीक्षा व्यवस्थाएं बन जाएंगी, जिससे मेडिकल शिक्षा का पूरा सिस्टम खंडित हो सकता है।
- राष्ट्रीय नियामकों के नियमों का हवाला: कांग्रेस ने याद दिलाया कि मेडिकल, नर्सिंग, आयुर्वेद, होम्योपैथी और डेंटल शिक्षा पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), NCISM, NCH, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया जैसे राष्ट्रीय नियामकों के सख्त नियम लागू होते हैं। ऐसे में राज्य स्तर पर बिना सोचे-समझे किया गया बदलाव नियामकों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है।
- विशेषज्ञों की राय के बिना बदलाव पर रोक: डॉ. गुप्ता ने मांग की है कि इतने बड़े नीतिगत बदलाव से पहले मेडिकल काउंसिल, वरिष्ठ डॉक्टरों, संबद्ध मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श किया जाना अनिवार्य होना चाहिए।
राज्यपाल के समक्ष रखी गई प्रमुख 5 मांगें
कांग्रेस ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निम्नलिखित कदम उठाएं:
- प्रस्तावित संशोधन को फिलहाल तुरंत प्रभाव से रोका जाए।
- इस विषय पर विचार के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
- इस मामले में सभी संबंधित पक्षों, चिकित्सा संघों और जनता से व्यापक सुझाव लिए जाएं।
- मौजूदा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की मूल व्यवस्था और स्वायत्तता को बरकरार रखा जाए।
- संशोधन लागू करने से पहले इसका विस्तृत प्रभाव अध्ययन (Regulatory Impact Assessment) कराया जाए।
इस पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई हैं।



